Monthly Magzine
Monday 19 Feb 2018

पौष मास में फागुनी उल्लास

  निशान्त
वार्ड-6 , निकट वन विभाग , पीलीबंगा-335803 ,
जिला-हनुमानगढ(राज.)
मो. 08104473197

मेड़ता की धरती पर देखे
दूर-दूर तक
तारामीरे के खेत
पौधे लदे थे
जड़ से लेकर चोटी तक
पीले-पीले फूलों से
पौष मास में था वहां
किसानों के सम्बल सा
फागुनी उल्लास
पाद टिप्पणी: (मरूस्थल में तारामीरे की फसल कभी-कभार टाईम पर बरसात होने पर ही लगती है । इसलिए यह किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का सम्बल है । )

बेरी भी हाथ पकड़ती है
आज तोड़ते हुए बेर
एकाएक ही हुआ बोध कि
देखो ! बेरी भी
लूट के लिए बढ़े हाथ को
पकड़ती है
करती है प्रतिरोध

बेपरवाही
वह उतना ही हो सकता था मेरा
जितना कि हुआ विरोधियों का
छुटपन से
कोशिश ही नहीं की मैंने
उसे अपनी ओर मोडऩे की
मेरी बेपरवाही से ही
पड़ गया वह
विरोधियों के हाथों

चाय वालों के कप
पहले-पहल अच्छे से
चीनी मिट्टी के कप में
परोसते थे चाय वाले चाय
धीरे-धीरे वे
स्टील के कपों पर आ गए
चाय-चीनी की कीमतें बढ़ीं तो
इन्होंने इन कपों के पैंदे
थोथे करा लिए
देखने में तो पूरे दिखते थे
लेकिन चाय
दो-चार घूंट ही निकलती थी
ग्राहक अपने को ठगा सा
महसूस करते थे
शायद ग्राहकों ने ही
टोका -टोकाई की होगी कि
इन्होंने इन कपों को भी छोड़ा
और कांच के गिलास अपनाए
अच्छे साफ  कांच के गिलास
इन्हें नहीं पोसाए तो
इन्होंने मटमैले कांच के
संकड़े पैंदे वाले गिलास अपनाए
बाद में प्लास्टिक का जमाना आ गया
तब पारदर्शी प्लास्टिक के कप आए
बीच में लालू के कुल्हड़ भी
कुछ दिन चले
अब तो कागज के भी
कप चल पड़े  हैं
इतने प्रयोगों से लगता है
चाय वालों की
एक आदर्श कप की खोज
आगे भी जारी रहेगी